गाजीपुर में विंध्य एक्सप्रेसवे को लेकर किसानों का विरोध, उचित मुआवजे की मांग पर एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
गाजीपुर/जमानियां: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में प्रस्तावित विंध्य पूर्वांचल-स्पर एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण का मुद्दा किसानों के बीच लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। जमीन जाने से प्रभावित किसानों ने उचित और वर्तमान मूल्य के अनुरूप मुआवजे की मांग को लेकर विरोध जताया है। किसानों का कहना है कि जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि उनके परिवार की आजीविका का प्रमुख साधन है। ऐसे में भूमि अधिग्रहण के बाद उनके सामने भविष्य की रोजी-रोटी और परिवार के भरण-पोषण का सवाल खड़ा हो सकता है।
जमानियां तहसील क्षेत्र में किसानों की ओर से इस मुद्दे को लेकर धरना-प्रदर्शन किए जाने और प्रशासन को अपनी मांगों से अवगत कराने का सिलसिला जारी है। किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उपजिलाधिकारी को पत्र सौंपकर उनकी समस्याओं को जिलाधिकारी तक पहुंचाने की मांग की।
किसानों ने कहा- जमीन के बदले उचित मुआवजा जरूरी
धरने में शामिल किसानों का कहना है कि एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए जिन परिवारों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है, उन्हें ऐसा मुआवजा मिलना चाहिए जिससे जमीन जाने के बाद परिवार आर्थिक संकट में न आए।
किसानों का तर्क है कि कृषि भूमि उनके लिए सिर्फ जमीन का एक टुकड़ा नहीं है। इसी जमीन से फसल, परिवार की आय और आने वाली पीढ़ियों की जरूरतें जुड़ी हुई हैं। जमीन चली जाने के बाद यदि पर्याप्त आर्थिक व्यवस्था नहीं होती है तो किसान परिवारों के सामने रोजगार और भविष्य की सुरक्षा का प्रश्न खड़ा होगा।
प्रदर्शन में शामिल किसानों ने प्रशासन से मांग की कि भूमि के मूल्यांकन और मुआवजे की प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से देखा जाए तथा प्रभावित परिवारों की वास्तविक स्थिति को भी ध्यान में रखा जाए।
कई गांवों के किसानों के शामिल होने का दावा
किसान नेताओं ने बताया कि आंदोलन में आसपास के कई गांवों के लोग शामिल हो रहे हैं। उनके अनुसार एक्सप्रेसवे परियोजना से अलग-अलग गांवों की कृषि भूमि और अन्य जमीन प्रभावित होने की स्थिति में है।
किसानों का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति या एक परिवार का मामला नहीं है। जिन-जिन गांवों में भूमि अधिग्रहण प्रस्तावित है, वहां के प्रभावित परिवारों की समस्याओं को सामूहिक रूप से प्रशासन के सामने रखना जरूरी है।
इसी क्रम में किसानों ने एसडीएम को ज्ञापन देकर अपनी प्रमुख मांगों पर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की।
डीएम को पत्र भेजने की मांग
किसान प्रतिनिधियों के मुताबिक, एसडीएम के समक्ष ज्ञापन सौंपते समय उनसे अनुरोध किया गया कि किसानों की मांगों को जिलाधिकारी तक भेजा जाए और मामले में गंभीरता से विचार किया जाए।
किसानों का कहना है कि वह प्रशासन के सामने अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखना चाहते हैं और चाहते हैं कि भूमि अधिग्रहण से जुड़े प्रत्येक पहलू पर प्रभावित किसानों के साथ संवाद किया जाए।
इससे पहले भी गाजीपुर में विंध्य पूर्वांचल-स्पर एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण के मुआवजे को लेकर किसानों की ओर से सर्किल रेट और बाजार मूल्य के आधार पर उचित मुआवजे की मांग सामने आई है।
किसानों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
धरने में शामिल किसान प्रतिनिधियों ने अपनी बातचीत में मुआवजे और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया से जुड़े कई मुद्दे उठाए। इनमें भूमि के मूल्यांकन की दोबारा समीक्षा, प्रभावित किसानों की खुली सुनवाई और जमीन के मूल्य का निष्पक्ष निर्धारण जैसी मांगें शामिल हैं।
किसानों का कहना है कि जमीन के मूल्यांकन में केवल कागजी दरों को देखने के बजाय क्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों और बाजार मूल्य को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
कुछ किसान नेताओं ने पूर्व की एक्सप्रेसवे परियोजनाओं में दिए गए मुआवजे और प्रतिकर राशि का उदाहरण देते हुए वर्तमान परियोजना में भी किसानों के हित में बेहतर मुआवजे की मांग की है। हालांकि, किसी विशेष राशि या मुआवजे की पात्रता का अंतिम निर्धारण संबंधित अधिग्रहण प्रक्रिया, लागू कानून और प्रशासनिक रिकॉर्ड के आधार पर ही होगा।
जमीन जाने के बाद रोजगार का सवाल
किसानों की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक जमीन जाने के बाद आजीविका का संकट है।
किसानों का कहना है कि कई परिवारों के लिए कृषि भूमि ही आय का मुख्य आधार है। यदि खेती की जमीन चली जाती है तो केवल जमीन का मूल्य मिलना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि परिवार के भविष्य पर भी इसका असर पड़ सकता है।
एक किसान प्रतिनिधि ने कहा कि आज जमीन के बदले मिलने वाली राशि कुछ समय के लिए आर्थिक मदद दे सकती है, लेकिन आने वाली पीढ़ियों की आजीविका का सवाल अलग है। उनका कहना है कि किसान इसीलिए ऐसा मुआवजा चाहते हैं जिससे जमीन देने के बाद भी परिवार की आर्थिक स्थिति सुरक्षित रह सके।
किसानों ने आंदोलन आगे बढ़ाने की बात कही
धरने में शामिल कुछ किसान नेताओं ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने अलग-अलग गांवों में भी विरोध कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही।
हालांकि, आंदोलन के स्वरूप और आगे की कार्रवाई के संबंध में अंतिम निर्णय किसान संगठनों और प्रशासन के बीच होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगा।
किसानों ने प्रशासन से बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की अपील भी की है। उनका कहना है कि जमीन अधिग्रहण जैसी प्रक्रिया में किसानों की बात सुनी जाए और किसी भी निर्णय से पहले प्रभावित परिवारों को पूरी जानकारी दी जाए।
किसानों का सवाल- जमीन जाएगी तो भविष्य कैसे चलेगा?
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने अपनी जमीन को लेकर भावनात्मक और आर्थिक दोनों तरह की चिंताएं सामने रखीं। उनका कहना है कि कृषि भूमि उनके परिवार की पीढ़ियों से जुड़ी हुई है और उसे खोने के बाद केवल आर्थिक मुआवजे से भविष्य की सभी समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता।
किसानों के मुताबिक, उनके बच्चों की पढ़ाई, परिवार का खर्च, खेती से होने वाली नियमित आय और भविष्य की जरूरतें इसी जमीन से जुड़ी हैं। इसलिए उनका आग्रह है कि भूमि अधिग्रहण से पहले मुआवजे और पुनर्वास जैसे मुद्दों पर स्पष्ट व्यवस्था की जाए।
प्रशासन के सामने अब क्या चुनौती है?
विंध्य पूर्वांचल-स्पर एक्सप्रेसवे से जुड़ी भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में प्रभावित किसानों की आपत्तियों और मुआवजे की मांगों को लेकर प्रशासन के सामने सबसे महत्वपूर्ण चुनौती किसानों और परियोजना से जुड़े पक्षों के बीच संवाद बनाए रखने की है।
किसानों की मांग है कि उनकी शिकायतों की सुनवाई हो और भूमि के मूल्यांकन से संबंधित आपत्तियों पर स्पष्ट जानकारी दी जाए।
हालिया रिपोर्टों के अनुसार गाजीपुर के अलग-अलग क्षेत्रों में किसान भूमि अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर प्रशासन को ज्ञापन दे चुके हैं। कुछ मामलों में किसानों ने भूमि के रिकॉर्ड और प्रस्तावित अधिग्रहण से जुड़ी आपत्तियां भी उठाई हैं।
आगे क्या होगा?
फिलहाल किसानों की ओर से उचित मुआवजे और भूमि मूल्यांकन की समीक्षा की मांग जारी है। किसानों ने प्रशासन से उनकी समस्याओं को जिलाधिकारी और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने की मांग की है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासन किसानों की आपत्तियों पर क्या कार्रवाई करता है और भूमि अधिग्रहण तथा मुआवजे से जुड़े विवाद का समाधान किस तरह निकाला जाता है।
MILITRO की इस ग्राउंड रिपोर्ट में किसानों द्वारा रखी गई मांगों और बयानों को उनके पक्ष के रूप में प्रस्तुत किया गया है। मुआवजे की अंतिम दर या कानूनी पात्रता का निर्धारण संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और लागू भूमि अधिग्रहण नियमों के अनुसार होगा।
