भदौरा CHC में सीजेरियन सुविधा से बदली तस्वीर, पीएम मोदी के जन्मदिन पर सुनीता सिंह ने मरीजों को बांटे फल
गाज़ीपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर गाज़ीपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भदौरा में मरीजों को फल वितरित किए गए। इस दौरान पूर्व विधायक सुनीता सिंह ने अस्पताल का निरीक्षण किया और मरीजों से बातचीत की। कार्यक्रम के दौरान अस्पताल में शुरू हुई सीजेरियन ऑपरेशन की सुविधा और ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं में हुए बदलाव को लेकर भी चर्चा हुई।
भदौरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ऑपरेशन थिएटर शुरू होने के बाद सीजेरियन ऑपरेशन से दूसरे बच्चे के जन्म की जानकारी सामने आई है। बातचीत के दौरान बताया गया कि 15 सितंबर को सीजेरियन ऑपरेशन किया गया था। स्थानीय स्तर पर इसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
भदौरा CHC में सीजेरियन सुविधा शुरू होने से क्या बदलेगा?
ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं के सामने सबसे बड़ी परेशानियों में से एक समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा मिलना है। खासकर जब सामान्य प्रसव के बजाय ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है, तो परिवारों को बड़े अस्पताल या निजी अस्पताल का रुख करना पड़ सकता है।
भदौरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ऑपरेशन थिएटर और सीजेरियन सुविधा शुरू होने के बाद स्थानीय मरीजों को अपने क्षेत्र में ही ऐसी चिकित्सा सुविधा मिलने की संभावना बढ़ी है। इससे गंभीर स्थिति में मरीज को दूसरे स्थान पर ले जाने की आवश्यकता कुछ मामलों में कम हो सकती है।
इंटरव्यू के दौरान सुनीता सिंह ने अस्पताल की बदलती व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले यहां सुविधाएं सीमित थीं, जबकि अब अस्पताल परिसर में अधिक चहल-पहल दिखाई देती है और डॉक्टरों की उपलब्धता भी बढ़ी है।
हालांकि किसी भी स्वास्थ्य सुविधा की वास्तविक उपयोगिता केवल भवन या उपकरण से तय नहीं होती। इसके लिए डॉक्टर, प्रशिक्षित स्टाफ, दवाएं, जांच की सुविधा, बिजली, ऑक्सीजन और जरूरी उपकरणों का लगातार उपलब्ध रहना भी जरूरी है।
दूसरा सीजेरियन ऑपरेशन होने की जानकारी
भदौरा CHC में सीजेरियन सुविधा शुरू होने के बाद दूसरे ऑपरेशन की जानकारी भी सामने आई। बातचीत में बताया गया कि इससे पहले एक सीजेरियन ऑपरेशन हो चुका था और 15 सितंबर को दूसरा ऑपरेशन किया गया।
इस उपलब्धि का श्रेय अस्पताल में काम कर रहे डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रयासों को दिया गया। बातचीत में डॉक्टर धनंजय समेत अस्पताल के अन्य चिकित्सकों के प्रयासों का भी उल्लेख किया गया।
इससे पहले गाज़ीपुर जिले के कासिमाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी सीजेरियन डिलीवरी की सुविधा शुरू होने की रिपोर्ट सामने आई थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव संबंधी सेवाओं को बढ़ाने पर काम हो रहा है। (NCR SAMACHAR LIVE)
गरीब परिवारों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह सुविधा?
ग्रामीण परिवारों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सिर्फ सुविधा का विषय नहीं बल्कि खर्च और समय से भी जुड़ी होती है। यदि किसी महिला को सीजेरियन ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है और नजदीकी सरकारी अस्पताल में सुविधा उपलब्ध नहीं होती, तो परिवार को दूसरे अस्पताल तक जाना पड़ सकता है।
निजी अस्पताल में इलाज का खर्च परिवार की आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। ऐसे में सरकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर जरूरी सुविधा उपलब्ध होने से आसपास के लोगों को राहत मिल सकती है।
इंटरव्यू के दौरान अस्पताल में जांच सुविधाओं को लेकर भी चर्चा हुई। सुनीता सिंह ने दावा किया कि CHC में कई प्रकार की जांच की सुविधा उपलब्ध हो चुकी है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्र के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में जांच की व्यवस्था समान रूप से उपलब्ध है या नहीं, यह अलग-अलग केंद्रों की स्थिति पर निर्भर करता है।
ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में अभी भी कई चुनौतियां
भदौरा CHC में सुविधाओं के विस्तार के साथ बातचीत में ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों की चुनौतियों का भी जिक्र हुआ। प्राथमिक और न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों तथा जांच सुविधाओं की उपलब्धता हर जगह एक जैसी नहीं है।
सुनीता सिंह ने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के बाद प्राथमिक स्तर के स्वास्थ्य केंद्रों पर भी ध्यान देने की जरूरत है। उनका कहना था कि कुछ छोटे स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीज पहुंच रहे हैं और वहां मौजूद डॉक्टर तथा अन्य कर्मचारी मरीजों को सेवाएं दे रहे हैं।
ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केवल एक अस्पताल में सुविधा शुरू होना पर्याप्त नहीं है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पताल तक पूरी व्यवस्था का आपस में जुड़ा होना जरूरी है।
ऑक्सीजन प्लांट को लेकर भी उठा सवाल
भदौरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कोरोना काल के दौरान बनाए गए ऑक्सीजन प्लांट का मुद्दा भी बातचीत में सामने आया।
इंटरव्यू में बताया गया कि प्लांट से जुड़ी व्यवस्थाएं पूरी करने के लिए प्रयास किए गए थे, लेकिन जनरेटर और कुछ अन्य व्यवस्थाओं के कारण इसे नियमित रूप से शुरू करने में समस्या आई। बातचीत में यह भी कहा गया कि कोरोना महामारी समाप्त होने के बाद इस व्यवस्था की गति धीमी पड़ गई।
सुनीता सिंह ने कहा कि वह इसे फिर से शुरू कराने के लिए प्रयास करेंगी। उन्होंने जमनिया और बरेवीन क्षेत्र में ऑक्सीजन प्लांट की व्यवस्था का उदाहरण देते हुए भदौरा में भी इसे व्यवस्थित करने की जरूरत बताई।
ऑक्सीजन प्लांट की मौजूदा स्थिति, उसकी तकनीकी क्षमता और वर्तमान संचालन को लेकर अस्पताल प्रशासन से अलग से आधिकारिक जानकारी मिलना जरूरी होगा। इसलिए इसे पूरी तरह चालू या बंद बताने से पहले आधिकारिक पुष्टि को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
अस्पताल में बढ़ी मरीजों की संख्या का दावा
बातचीत के दौरान CHC में रोजाना होने वाली OPD को लेकर भी चर्चा हुई। इंटरव्यू में लगभग साढ़े तीन सौ मरीजों की OPD का आंकड़ा बताया गया।
यह आंकड़ा स्थानीय बातचीत में बताया गया है, इसलिए इसे अस्पताल के आधिकारिक OPD रिकॉर्ड से अलग समझना चाहिए। यदि अस्पताल प्रशासन द्वारा नियमित OPD का आंकड़ा जारी किया जाता है, तो उससे मरीजों की वास्तविक संख्या की बेहतर पुष्टि हो सकती है।
फिर भी ग्रामीण अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ना इस बात का संकेत हो सकता है कि लोग स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके साथ यह भी जरूरी है कि बढ़ती OPD के अनुपात में डॉक्टर, स्टाफ, दवाएं और जांच सुविधाएं उपलब्ध रहें।
मेडिकल कॉलेज और डॉक्टरों की उपलब्धता पर भी चर्चा
इंटरव्यू में गाज़ीपुर में मेडिकल कॉलेज और डॉक्टरों की उपलब्धता को लेकर भी चर्चा हुई। सुनीता सिंह ने कहा कि पहले जिले में मेडिकल कॉलेज की कमी थी, जबकि अब मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था शुरू होने से भविष्य में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है।
उन्होंने जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को कोरोना काल के अनुभव से भी जोड़कर देखा। कोरोना महामारी के दौरान गंभीर मरीजों को बड़े शहरों और दूसरे जिलों के अस्पतालों तक ले जाने की आवश्यकता पड़ती थी। स्थानीय स्तर पर चिकित्सा सुविधाएं मजबूत होने से ऐसी स्थिति में मरीजों को शुरुआती उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
हालांकि किसी स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार का आकलन केवल अस्पतालों की संख्या से नहीं बल्कि डॉक्टरों की उपलब्धता, मरीजों की पहुंच, जांच, दवा, आपातकालीन सेवाओं और उपचार के परिणाम जैसे कई पहलुओं से किया जाना चाहिए।
पीएम मोदी के जन्मदिन पर मरीजों को फल वितरण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन 17 सितंबर को मनाया गया। इस अवसर पर भदौरा CHC में मरीजों को फल वितरित किए गए। प्रधानमंत्री की ओर से भी जन्मदिन पर मिले शुभकामना संदेशों के लिए आभार व्यक्त किया गया और सेवा गतिविधियों में शामिल लोगों की सराहना की गई। (PM India)
गाज़ीपुर समेत उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में इस अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। ऐसे कार्यक्रमों में स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों से मिलना और फल वितरण जैसी गतिविधियां भी शामिल रहीं।
भदौरा CHC का यह कार्यक्रम स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मुद्दों को भी सामने लाता है। एक तरफ अस्पताल में सीजेरियन सुविधा शुरू होने की जानकारी है, वहीं दूसरी तरफ ऑक्सीजन प्लांट और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में जांच एवं डॉक्टरों की उपलब्धता जैसी चुनौतियां अभी चर्चा का विषय हैं।
आगे क्या जरूरी है?
भदौरा CHC में सीजेरियन सुविधा शुरू होना स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण कदम हो सकता है, लेकिन इस सुविधा को लगातार प्रभावी बनाए रखना उससे भी ज्यादा जरूरी है।
इसके लिए ऑपरेशन थिएटर का नियमित संचालन, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता, प्रशिक्षित स्टाफ, जरूरी दवाएं, जांच सुविधाएं, ऑक्सीजन और आपातकालीन व्यवस्था लगातार उपलब्ध रहनी चाहिए।
इसके साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को भी मजबूत करने की जरूरत है ताकि मरीजों को छोटी बीमारी या शुरुआती जांच के लिए दूर न जाना पड़े और जरूरत पड़ने पर उन्हें समय पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल तक रेफर किया जा सके।
भदौरा CHC में सीजेरियन ऑपरेशन की शुरुआत और दूसरा ऑपरेशन होने की जानकारी ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था में हो रहे बदलाव की एक तस्वीर पेश करती है। अब इस सुविधा का नियमित संचालन और इसकी गुणवत्ता ही तय करेगी कि आसपास के लोगों को लंबे समय में इसका कितना लाभ मिलता है।
