PM Modi-Putin Meeting: पुतिन को मोदी ने दी ‘तिरुक्कुरल’ की खास किताब, भारत-रूस के बीच इन बड़े मुद्दों पर हुई बात
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच शुक्रवार को महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुलाकात हुई। दोनों नेताओं की मुलाकात के दौरान भारत और रूस के लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक संबंधों के साथ-साथ व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, तकनीक और आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को तमिल के प्रसिद्ध प्राचीन ग्रंथ ‘तिरुक्कुरल’ (Thirukkural) का रूसी भाषा में अनुवादित संस्करण भी भेंट किया। यह किताब अपने छोटे-छोटे दोहों/कुरलों के माध्यम से नैतिकता, शासन, सामाजिक जीवन, अर्थव्यवस्था और मानवीय मूल्यों जैसे विषयों पर विचार प्रस्तुत करती है। इस उपहार को भारत की सांस्कृतिक कूटनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
पुतिन से गर्मजोशी से मिले पीएम मोदी
नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात की तस्वीरें सामने आने के बाद दोनों नेताओं की पुरानी मित्रता एक बार फिर चर्चा में आ गई। दोनों नेताओं ने हाथ मिलाया और गर्मजोशी से एक-दूसरे का अभिवादन किया।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और राजधानी दिल्ली में 18वें BRICS Summit की तैयारियां चल रही हैं। राष्ट्रपति पुतिन 11 सितंबर को भारत पहुंचे और BRICS सम्मेलन के अलावा भारत के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी उनके दौरे के एजेंडे में रही।
प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन के बीच इससे पहले अगस्त के अंत में किर्गिस्तान के बिश्केक में SCO Summit के दौरान मुलाकात हुई थी। उस बैठक में दोनों नेताओं ने भारत-रूस संबंधों के राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और लोगों के बीच संपर्क समेत कई क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की थी।
पुतिन को ‘तिरुक्कुरल’ क्यों दिया गया?
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा राष्ट्रपति पुतिन को तिरुक्कुरल की रूसी भाषा में प्रति भेंट करना इस मुलाकात का एक महत्वपूर्ण पहलू रहा। तिरुक्कुरल तमिल साहित्य की प्रसिद्ध कृति है, जिसके रचयिता संत-कवि तिरुवल्लुवर माने जाते हैं।
इस ग्रंथ में जीवन, नैतिकता, शासन, समाज, अर्थव्यवस्था और मानवीय व्यवहार से जुड़े विचारों को बेहद संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत किया गया है। यही वजह है कि इसे केवल साहित्यिक पुस्तक के तौर पर नहीं बल्कि भारतीय विचार परंपरा की महत्वपूर्ण कृति के रूप में भी देखा जाता है।
राष्ट्रपति पुतिन को इसका रूसी अनुवाद देना भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का एक प्रतीकात्मक उदाहरण माना जा सकता है। दोनों देशों के राजनीतिक और रणनीतिक संबंधों के साथ सांस्कृतिक जुड़ाव को सामने रखना भारत-रूस रिश्तों की व्यापक प्रकृति को दर्शाता है।
व्यापार बढ़ाने पर भी नजर
मोदी-पुतिन वार्ता का एक अहम हिस्सा भारत और रूस के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने से जुड़ा है। दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने की संभावनाओं पर लगातार जोर दिया जा रहा है।
भारत के लिए एक बड़ा मुद्दा यह है कि भारतीय कंपनियों और उत्पादों के लिए रूसी बाजार में पहुंच आसान हो। इसके लिए लॉजिस्टिक्स, भुगतान व्यवस्था और व्यापार की लागत जैसे विषय महत्वपूर्ण हैं।
भारत और रूस के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार तथा वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था को लेकर भी लंबे समय से चर्चा होती रही है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मुद्रा विनिमय से जुड़े खर्च और कुछ भुगतान संबंधी कठिनाइयों को कम करना है।
रूस के साथ व्यापार में परिवहन लागत भी एक महत्वपूर्ण विषय है। अगर भारतीय उत्पादों को रूस तक कम लागत और कम समय में पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत होती है, तो दोनों देशों के बीच व्यापार को और विस्तार मिल सकता है।
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक मोदी-पुतिन वार्ता में व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और व्यापक आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
रूस की कंपनियों के लिए भारत क्यों महत्वपूर्ण?
भारत सिर्फ रूसी सामान खरीदने वाला बाजार नहीं रहना चाहता, बल्कि Make in India और joint manufacturing के जरिए दोनों देशों के बीच उत्पादन सहयोग को भी बढ़ाने की कोशिश है।
रूसी कंपनियों के लिए भारत का बड़ा बाजार, कुशल मानव संसाधन और वैश्विक बाजारों तक पहुंच महत्वपूर्ण अवसर पैदा कर सकते हैं। दूसरी तरफ भारत के लिए रूस की तकनीक और औद्योगिक विशेषज्ञता कई रणनीतिक क्षेत्रों में उपयोगी हो सकती है।
रिपोर्टों में भारत-रूस सहयोग के संभावित क्षेत्रों में विनिर्माण, ऊर्जा, रेलवे, उर्वरक, रक्षा और अन्य रणनीतिक सेक्टरों का उल्लेख किया गया है।
रक्षा क्षेत्र में भी अहम बातचीत
भारत और रूस के रिश्तों में रक्षा सहयोग लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। दोनों देशों के बीच सैन्य और रक्षा तकनीक से जुड़ी साझेदारी कई दशकों पुरानी है।
इस बार भी रक्षा सहयोग पर नजर है। Su-57 जैसे रूसी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान को लेकर संभावित सहयोग की खबरें पहले से चर्चा में हैं। हालांकि, इसे अभी पक्की डील या अंतिम समझौता बताना सही नहीं होगा। उपलब्ध रिपोर्टों में इसे संभावित एजेंडे या चर्चा के विषय के रूप में बताया गया है।
भारत-रूस रक्षा सहयोग के साथ BrahMos जैसी संयुक्त परियोजनाएं भी दोनों देशों के तकनीकी संबंधों का महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। भविष्य में रक्षा उत्पादन और तकनीक साझा करने के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर ध्यान दिया जा सकता है।
परमाणु ऊर्जा और तकनीकी सहयोग पर भी नजर
भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए रूस के साथ civil nuclear energy सहयोग भी महत्वपूर्ण है। ताजा रिपोर्टों में मोदी-पुतिन वार्ता के संभावित प्रमुख क्षेत्रों में परमाणु ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी सहयोग का उल्लेख किया गया है।
दोनों देश पहले से ही ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग करते रहे हैं। आने वाले समय में परमाणु ऊर्जा, औद्योगिक तकनीक और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी को विस्तार देने की संभावना भारत-रूस संबंधों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
BRICS Summit से पहले बढ़ी कूटनीतिक हलचल
मोदी-पुतिन बैठक के साथ दिल्ली में BRICS Summit को लेकर भी गतिविधियां तेज हैं। 18वां BRICS Summit भारत की अध्यक्षता में 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हो रहा है।
रूस के राष्ट्रपति पुतिन के अलावा कई देशों के शीर्ष नेता सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की भारत यात्रा भी इस सम्मेलन के दौरान महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रमों में शामिल है। उनके प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक की भी योजना है।
ऐसे समय में मोदी-पुतिन की द्विपक्षीय बैठक भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि BRICS के मंच पर आर्थिक सहयोग, वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला जैसे विषयों पर चर्चा हो रही है।
भारत-रूस रिश्तों में आगे क्या?
मोदी और पुतिन की मुलाकात से साफ है कि दोनों देश अपने रणनीतिक संबंधों को केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं रखना चाहते। व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, विनिर्माण, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की कोशिश दिखाई दे रही है।
भारत के लिए रूस के साथ संबंधों में एक बड़ा लक्ष्य व्यापार को अधिक संतुलित बनाना और भारतीय उत्पादों के लिए रूसी बाजार में नए अवसर तैयार करना है। वहीं रूस के लिए भारत एक बड़ा बाजार और विनिर्माण केंद्र बन सकता है।
इस पूरी कूटनीतिक तस्वीर में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा राष्ट्रपति पुतिन को रूसी भाषा में तिरुक्कुरल की प्रति भेंट करना एक अलग संदेश देता है। यह सिर्फ एक पुस्तक का उपहार नहीं बल्कि भारतीय साहित्य और विचार परंपरा को रूस के साथ साझा करने का सांस्कृतिक संकेत भी है।
आने वाले दिनों में BRICS Summit के दौरान होने वाली अन्य द्विपक्षीय बैठकों और भारत-रूस के बीच होने वाली घोषणाओं से यह स्पष्ट होगा कि आज की बातचीत कितने ठोस आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक परिणामों में बदलती है।
स्रोत: प्रधानमंत्री कार्यालय/PIB, Reuters और अन्य विश्वसनीय रिपोर्टों के आधार पर तथ्य सत्यापन