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ममता बनर्जी फिर नंदीग्राम से उतरेंगी? शुभेंदु अधिकारी के गढ़ में 6 अक्टूबर को उपचुनाव

 

नंदीग्राम में फिर ममता बनर्जी बनाम शुभेंदु अधिकारी? उपचुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल

West Bengal Nandigram Bypoll 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर नंदीग्राम चर्चा के केंद्र में है। चुनाव आयोग ने नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की तारीख घोषित कर दी है। दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा, जबकि 9 अक्टूबर को वोटों की गिनती की जाएगी।

लेकिन इन दोनों सीटों में सबसे ज्यादा राजनीतिक नजरें नंदीग्राम पर टिकी हैं। वजह है इस सीट का ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी, दोनों के राजनीतिक सफर से गहरा जुड़ाव।

ममता बनर्जी फिर नंदीग्राम से उतरेंगी? शुभेंदु अधिकारी के गढ़ में 6 अक्टूबर को उपचुनाव


नंदीग्राम से क्या फिर चुनाव लड़ेंगी ममता बनर्जी?

नंदीग्राम उपचुनाव की घोषणा के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी खुद इस सीट से चुनाव मैदान में उतरेंगी?

अभी तक ममता बनर्जी की ओर से नंदीग्राम से चुनाव लड़ने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। हालांकि, राजनीतिक चर्चाओं के बीच यह संभावना लगातार सुर्खियों में बनी हुई है।

दिलचस्प बात यह है कि तृणमूल कांग्रेस के बागी धड़े की ओर से भी ममता बनर्जी को नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया गया है। बागी खेमे ने कहा है कि अगर ममता बनर्जी नंदीग्राम से उम्मीदवार बनती हैं तो वे उनके खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारेंगे।

ऐसे में नंदीग्राम का मुकाबला सिर्फ बीजेपी और टीएमसी के बीच चुनावी लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि इसके साथ तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही राजनीतिक खींचतान भी जुड़ गई है।

शुभेंदु अधिकारी का गढ़ क्यों बना नंदीग्राम?

नंदीग्राम का नाम पश्चिम बंगाल की राजनीति में काफी पहले से महत्वपूर्ण रहा है। 2007 के जमीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ने इस क्षेत्र को राज्य की राजनीति के केंद्र में ला दिया था। उस समय ममता बनर्जी ने आंदोलन को राजनीतिक मुद्दे के रूप में मजबूती से उठाया था।

इसी आंदोलन ने ममता बनर्जी की राजनीतिक पहचान को और मजबूत किया और आगे चलकर पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे के लंबे शासन के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस की राजनीति को मजबूती मिली।

लेकिन बाद के वर्षों में यही नंदीग्राम ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच बड़े राजनीतिक मुकाबले का प्रतीक बन गया।

2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से चुनाव लड़ा था। उनके सामने उस समय बीजेपी उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी थे। मुकाबला बेहद चर्चित रहा और अंत में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हरा दिया।

इसके बाद नंदीग्राम दोनों नेताओं के राजनीतिक संघर्ष का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया।

2026 में फिर शुभेंदु अधिकारी की बड़ी जीत

2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भी नंदीग्राम पर सबकी नजरें थीं। शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम से जीत दर्ज की और बाद में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बने।

इसके बाद उन्होंने नंदीग्राम विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया और भवानीपुर सीट को बरकरार रखा। इसी वजह से नंदीग्राम विधानसभा सीट खाली हुई और अब यहां उपचुनाव कराया जा रहा है।

यही कारण है कि आगामी उपचुनाव को बीजेपी और टीएमसी, दोनों के लिए राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

टीएमसी के सामने एक और बड़ी चुनौती

नंदीग्राम उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के सामने सिर्फ बीजेपी की चुनौती नहीं है। पार्टी के भीतर नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर भी विवाद चल रहा है।

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले धड़े और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी धड़े के बीच तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह पर दावा किया जा रहा है। चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को बातचीत के लिए बुलाया है।

यह विवाद नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव के उम्मीदवारों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि चुनावी मैदान में किसे आधिकारिक टीएमसी उम्मीदवार माना जाएगा, इसमें पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह की भूमिका अहम होगी।

रिपोर्टों के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच इस विवाद पर चुनाव आयोग की प्रक्रिया उपचुनाव के नामांकन की समयसीमा से पहले आगे बढ़ सकती है। नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 16 सितंबर है।

क्या ममता बनर्जी के लिए यह वापसी का मौका होगा?

अगर ममता बनर्जी खुद नंदीग्राम से चुनाव लड़ती हैं तो यह मुकाबला सिर्फ एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं रहेगा।

यह ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच पुराने राजनीतिक मुकाबले का नया अध्याय बन सकता है।

ममता बनर्जी के लिए नंदीग्राम भावनात्मक और राजनीतिक, दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है। वहीं शुभेंदु अधिकारी के लिए यह सीट उनके मजबूत राजनीतिक आधार का प्रतीक बन चुकी है।

इसी वजह से अगर ममता बनर्जी यहां से चुनाव लड़ने का फैसला करती हैं तो पूरे देश की नजरें नंदीग्राम पर टिक सकती हैं।

हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ममता बनर्जी स्वयं उम्मीदवार होंगी या तृणमूल कांग्रेस किसी अन्य नेता को मैदान में उतारेगी। पार्टी की ओर से इस संबंध में अंतिम आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

बीजेपी भी नंदीग्राम को लेकर तैयार

उपचुनाव की अहमियत को देखते हुए बीजेपी ने भी संगठनात्मक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी हैं। ताजा रिपोर्ट के अनुसार बीजेपी ने अपनी नई राज्य कार्यकारिणी का गठन किया है और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को तमलुक संगठनात्मक जिले की जिम्मेदारी दी गई है, जिसके अंतर्गत नंदीग्राम भी आता है।

इससे साफ है कि नंदीग्राम उपचुनाव को बीजेपी भी बेहद गंभीरता से ले रही है।

6 अक्टूबर को होगा मतदान, 9 अक्टूबर को आएगा परिणाम

चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा।

इसके बाद 9 अक्टूबर 2026 को मतगणना होगी और परिणाम सामने आएगा।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नंदीग्राम में टीएमसी किसे मैदान में उतारती है।

क्या ममता बनर्जी खुद शुभेंदु अधिकारी के गढ़ में उतरकर एक बार फिर राजनीतिक चुनौती देंगी?

या पार्टी किसी दूसरे चेहरे पर भरोसा करेगी?

और अगर ममता बनर्जी मैदान में उतरती हैं तो क्या वह नंदीग्राम में अपनी पिछली हार का हिसाब बराबर कर पाएंगी?

इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में साफ होंगे। फिलहाल इतना तय है कि नंदीग्राम उपचुनाव पश्चिम बंगाल की सबसे चर्चित चुनावी लड़ाइयों में से एक बनने जा रहा है।

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