गाजीपुर के कुर्रा में बाढ़ का कहर: मला बस्ती में पानी, ट्यूब के सहारे आवागमन
गाजीपुर। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में लगातार बढ़ते पानी ने ग्रामीण इलाकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ग्राम सभा कुर्रा की मल्लाह बस्ती में जलभराव की स्थिति ऐसी हो गई है कि लोगों के लिए सामान्य आवागमन भी मुश्किल हो गया है। बस्ती के आसपास पानी भरने के कारण ग्रामीणों को आने-जाने के लिए ट्यूब का सहारा लेना पड़ रहा है।
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान सामने आया कि बस्ती के कई हिस्सों में पानी काफी अधिक है। कुछ ग्रामीणों के मुताबिक कई स्थानों पर पानी कमर तक पहुंच रहा है। ऐसे हालात में लोग जरूरी सामान और राशन आदि लाने-ले जाने के लिए भी पानी के बीच से गुजरने को मजबूर हैं।
घरों तक पहुंचा पानी, मिट्टी के मकानों को नुकसान की चिंता
ग्रामीणों ने बताया कि जलभराव का असर उनके घरों तक पहुंच गया है। कुछ लोगों का कहना है कि पानी के कारण घरों के नीचे की मिट्टी गलने लगी है, जिससे कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
ग्रामीणों के मुताबिक बस्ती में कई परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं और रोज कमाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। ऐसे परिवारों के लिए घर और जरूरी सामान प्रभावित होना बड़ी परेशानी बन गया है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि घरों में रखा पशुओं का चारा भी पानी से भीग गया है। बस्ती में रहने वाले परिवार गाय, भैंस और बकरियों जैसे पशु पालते हैं। पानी भरने के कारण पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखने और उनके लिए चारे की व्यवस्था करने में भी परेशानी हो रही है।
ट्यूब के सहारे हो रहा आवागमन
बाढ़ और जलभराव के कारण बस्ती तक आने-जाने का सामान्य रास्ता प्रभावित होने की बात ग्रामीणों ने कही। इसी वजह से कुछ लोग ट्यूब का सहारा लेकर पानी पार कर रहे हैं।
ग्राउंड रिपोर्ट में ग्रामीणों को पानी के बीच से आते-जाते देखा गया। लोगों का कहना है कि जरूरी सामान लेने के लिए भी उन्हें इसी तरह पानी पार करना पड़ रहा है।
एक ग्रामीण ने बताया कि पानी काफी अधिक है और ट्यूब के सहारे ही आवागमन करना पड़ रहा है। इस दौरान पानी में किसी तरह की दुर्घटना होने का खतरा भी बना रहता है।
खेतों में धान की फसल प्रभावित
जलभराव का असर खेती पर भी दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों के अनुसार इलाके में बड़ी संख्या में किसान धान की खेती करते हैं और पानी भरने से कई खेत प्रभावित हुए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जिन खेतों में धान की फसल बोई गई थी, उनमें पानी भर जाने से फसल को नुकसान पहुंचा है। हालांकि, वास्तविक नुकसान कितना हुआ है, इसका सही आकलन प्रशासनिक सर्वे के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
किसानों और ग्रामीणों की मांग है कि प्रभावित क्षेत्रों का मौके पर पहुंचकर सर्वे कराया जाए और नुकसान के आधार पर पात्र परिवारों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराई जाए।
सड़क, नाली और रोशनी की समस्या का भी मुद्दा
ग्रामीणों ने जलभराव के साथ-साथ बस्ती में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी उठाया। लोगों के अनुसार इलाके में सड़क, नाली और प्रकाश व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जलनिकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश या बाढ़ की स्थिति में समस्या और बढ़ जाती है। पानी लंबे समय तक जमा रहने से घरों, रास्तों और खेती पर इसका असर पड़ता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई मदद की गुहार
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से उनकी स्थिति देखने की अपील की। मोहम्मद हैस खान समेत अन्य ग्रामीणों ने मांग की कि संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लें।
ग्रामीणों का कहना है कि जिन परिवारों की फसल, घर या पशुओं के चारे को नुकसान हुआ है, उनका उचित सर्वे कराया जाए और नियमानुसार मुआवजा या सहायता उपलब्ध कराई जाए।
एक ग्रामीण ने कहा कि उनकी मुख्य मांग यही है कि जिन लोगों का नुकसान हुआ है, प्रशासन मौके पर आकर स्थिति देखे और नुकसान के अनुसार उचित सहायता प्रदान करे।
ग्राउंड जीरो से सामने आई ग्रामीणों की परेशानी
कुर्रा की मल्लाह बस्ती की यह तस्वीर ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव से पैदा होने वाली परेशानियों को सामने लाती है। पानी के बीच से आवागमन, घरों में पहुंचता पानी, भीगा हुआ पशु चारा और खेतों में जलभराव ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
फिलहाल ग्रामीणों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर है। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति का कितना जायजा लेते हैं और प्रभावित परिवारों के लिए राहत एवं मुआवजे को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।
यह रिपोर्ट ग्रामीणों द्वारा बताए गए हालात और मौके पर की गई ग्राउंड रिपोर्टिंग पर आधारित है। फसल एवं संपत्ति के वास्तविक नुकसान का आधिकारिक आंकड़ा संबंधित विभाग के सर्वे के बाद ही स्पष्ट होगा।
